
Sanjay Mishra
टैक्सी ड्राइवर फ़िरोज़ के रूप में
- नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड, सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता (72वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार)
- फ़िल्मफ़ेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता — दो बार (आँखों देखी, वध)
फ़िरोज़ को शादियों के सीज़न की कमाई चाहिए, वह दोगुना किराया माँगता है और चुप होने का नाम नहीं लेता। फिर वह एक अजनबी माँ का शव अपनी टैक्सी की छत पर बाँधता है और उसके तीन झगड़ते बेटों को उनकी ज़िंदगी की सबसे लंबी रात के सफ़र पर ले जाता है। ‘आँखों देखी’, ‘मसान’ और ‘वध’ के अभिनेता संजय मिश्रा इस फ़िल्म का हँसाता और रुलाता दिल हैं।
प्रमुख फ़िल्मेंआँखों देखी, मसान, वध, भक्षक
“हाथ तुम ही लगाओ, अम्मा तुम्हारी है।”













